मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत, अब 31 मार्च तक कृषि लोन चुकाने की बाध्यता खत्म

Parthadmin

इंदौर: मध्य प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य सरकार ने कृषि लोन की राशि 31 मार्च तक जमा करने की बाध्यता को खत्म करने का फैसला किया है. बुधवार को इंदौर में बलराम कृषि महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा की. इससे प्रदेश में 0% पर कृषि ऋण लेने वाले किसान अब डिफॉल्टर होने से बच सकेंगे.

मार्च का झंझट खत्म

सीएम डॉक्टर मोहन यादव ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा, ” राज्य सरकार ने इसी साल निर्णय किया है कि अब 6-6 महीने पर किसानों को अपना खाता पलटाने की जरूरत नहीं है. अगर किसान फसल के लिए ऋण जून महीने में लेंगे तो अगले साल जून में ही पैसा जमा करना है. मार्च का कोई झंझट पालने की जरूरत नहीं है.”

16 विभाग मिलकर मनाएगा किसान कल्याण वर्ष

सरकार ने उद्यानिकी विभाग, कृषि विभाग और एमएसएमई लघु कुटीर उद्योग सहित अन्य प्रकार के विभागों को एक साथ जोड़कर किसान कल्याण वर्ष मनाने की घोषणा की. 16 विभागों को जोड़कर एक यूनिट बनाया है, जिससे किसान लाभान्वित हो सकेंगे. सीएम मोहन यादव ने कहा, ” मध्य प्रदेश नदियों का मायका है. यहां करीब 250 से ज्यादा नदियां अलग-अलग क्षेत्रों से निकलकर पूरे प्रदेश सहित अन्य राज्यों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं.”

नर्मदा मैया के आशीर्वाद से इंदौर में तरक्की

सीएम ने कहा, ” इंदौर आगे बढ़ा है तो उसमें सबसे बड़ा योगदान नर्मदा मैया के आशीर्वाद है. साल 2002-3 तक केवल 7.5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी. हमारे 2.5 साल के कार्यकाल में सिंचाई का रक्बा बढ़कर 10 लाख हेक्टेयर हो गया. इस साल गेहूं 2625 रुपए के समर्थन मूल्य पर खरीदा गया है.”

सरकार की योजना किसान अधारित

सरकार का दावा है कि भावांतर योजना के बलबूते किसानों को नुकसान की भरपाई की गई है. वहीं, जल्द ही पीकेसी योजना के माध्यम से श्योपुर से लेकर भिंड, मुरैना, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच और मंदसौर सहित 13 जिलों के अंदर पानी मिलेगा. सरकार की हर एक योजना किसान आधारित बन रही है.

सीएम मोहन यादव ने वादा करते हुए कहा कि अब हम किसानों को गर्मी की फसल के टाइम सिंचाई के लिए दिन में बिजली देंगे, जिससे रात की बिजली का संकट खत्म हो जाएगा. अभी हमारे राज्य में 12% दुग्ध उत्पादन होता है इसको 20% तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. जो दूध का उत्पादन करना चाहते हैं उन्हें 40 लाख की डेरी के लिए 10 लाख रुपए सरकार देगी. फसल को खराब करने वाली नीलगाय को हेलीकॉप्टर के माध्यम से पकड़कर अभ्यारण्य में छोड़ा जाएगा.

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