नागपंचमी पर आस्था का सैलाब, नागलवाड़ी में 4 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने किए बाबा भिलट देव के दर्शन

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बड़वानी/उज्जैन/विदिशा : निमाड़ के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल नागलवाड़ी स्थित बाबा भिलट देव शिखरधाम में नागपंचमी के महापर्व पर दिखा आस्था का सैलाब. सोमवार को नागपंचमी पर 4 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे. रविवार सुबह से सोमवार सुबह तक ही 60 से 70 हजार श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके थे. रिमझिम बारिश और 4 किलोमीटर लंबे पहाड़ी रास्ते की चढ़ाई भी श्रद्धालुओं की आस्था को नहीं रोक सकी.

नागलवाड़ी गांव से 4 किमी दूर पहाड़ी पर मंदिर

हाथों में पूजा सामग्री और बाबा के जयकारों के साथ श्रद्धालु पैदल शिखरधाम की ओर बढ़े. पूरे पहाड़ी क्षेत्र में जय बाबा भिलट देव के जयकारे गूंजे. नागलवाड़ी गांव से मंदिर करीब 4 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है. नागपंचमी पर्व को लेकर मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए. मुख्य पुजारी राजेंद्र बाबा के मुताबिक “नागपंचमी की पूर्व संध्या पर रात करीब 10 बजे से बाबा भिलट देव का 101 लीटर दूध से विशेष अभिषेक किया गया. इसके बाद सोमवार तड़के करीब 4 बजे बाबा का चोला श्रृंगार किया गया. ब्रह्म मुहूर्त में बाबा की महाआरती की गई और इसके बाद बाबा को 108 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया.”

800 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी का वितरण किया गया. विशेष श्रृंगार और आरती के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही. बाबा भिलट देव के इतिहास को लेकर कई लोककथाएं और धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. बाबा भिलट देव का जन्म करीब 800 वर्ष पहले हरदा जिले के रोलगांव-पाटन क्षेत्र में एक गवली परिवार में हुआ है. उनके माता-पिता को भगवान शिव का भक्त बताया जाता है. लंबे समय तक संतान नहीं होने पर उन्होंने भगवान शिव की तपस्या की और मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया.

क्या कहती है लोककथा

लोककथा के अनुसार भगवान शिव ने वरदान के साथ यह शर्त भी रखी थी कि उनकी भक्ति और दिए गए वचन को कभी नहीं भुलाया जाए. जब माता-पिता से भूल हुई तो भगवान शिव बालक को अपने साथ ले गए. इसी कथा में बताया जाता है कि बालक की शिक्षा-दीक्षा भगवान शिव के मार्गदर्शन में हुई और आगे चलकर बाबा भिलट देव की पहचान सिद्ध पुरुष तथा नाग स्वरूप से जुड़ी. स्थानीय परंपरा में बाबा को नागदेवता के स्वरूप से जोड़ा जाता है.

पुलिस के साथ ही कई विभागों की टीमें तैनात

श्रद्धालुओं की मान्यता है कि बाबा भिलट देव के दरबार में की गई प्रार्थना और मनोकामना पूरी होती है. मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में 155 से अधिक सीसीटीवी से निगरानी की गई. पुलिस जवानों के साथ मंदिर समिति के 2 हजार से अधिक वालेंटियर्स भी व्यवस्थाओं में लगाए गए. निमाड़ रेंज डीआईजी सिमाला प्रसाद, एसपी पद्म विलोचन शुक्ल, एडिशनल एसपी धीरज बब्बर और सेंधवा एसडीओपी अजय वाघमारे सहित अधिकारियों ने शिखरधाम पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया.

डीआईजी सिमाला प्रसाद ने बताया “पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और मंदिर समिति के बीच समन्वय बनाकर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, बिजली और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है.”

क्रिकेटर उमेश यादव ने किए बाबा महाकाल के दर्शन

उज्जैन में नागपंचमी पर भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव अपनी पत्नी तान्या वाधवा के साथ धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे. उन्होंने श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और भस्म आरती में शामिल हुए. उन्होंने वर्ष में केवल एक बार नागपंचमी के दिन खुलने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर के मंदिर में भी शीश नवाया.

दर्शन और पूजन के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए उमेश यादव ने कहा “नागचंद्रेश्वर भगवान के दर्शन के साथ बाबा महाकाल की भस्म आरती और दर्शन का सौभाग्य मिलना मेरे लिए सोने पर सुहागा जैसा है. सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी का अद्भुत संयोग होने से मन को अत्यंत प्रसन्नता और आनंद की अनुभूति हुई है.”

विदिशा के नागदेव मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

विदिशा के रायसेन गेट (किला अंदर) स्थित प्रसिद्ध नाग मंदिर (नागेश्वर धाम) में नागपंचमी पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. सैकड़ों वर्ष पुराने इस मंदिर में तड़के से ही भगवान नागदेवता एवं शिवलिंग के दर्शन, पूजन और जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी रही. श्रद्धालु नरेंद्र कुमार सोनी ने बताया “यह मंदिर ऐतिहासिक स्थल है. यहां नागपंचमी पर हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.” मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित नारायण प्रसाद शर्मा ने बताया “इस मंदिर के प्रति यह मान्यता है कि जिन दंपत्तियों को वर्षों से संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ है, वे यहां आकर मन्नत मांगते हैं. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार अतीत में इस स्थान पर 30 फीट लंबे शेषनाग के रूप में दर्शन की गाथाएं प्रचलित हैं.”

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