मुंबई। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले में सातवीं रैंक हासिल करने वाली अभ्यर्थी ऋतुजा पाटिल को अदालत ने पांच सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने उसे मंगलवार को उत्तर महाराष्ट्र के नंदुरबार से गिरफ्तार किया था। बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शायना पाटिल ने उसे तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
MPSC पेपर लीक मामले में अब तक 6 गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार 22 मार्च को आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर स्क्रीनिंग परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले ही कुछ आरोपितों के हाथ लग गया था।
आरोप है कि ऋतुजा को भी परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। उसे कथित तौर पर परीक्षा में 10 प्रश्न जानबूझकर गलत करने की सलाह दी गई थी, ताकि उसके प्रदर्शन पर संदेह न हो।
अपराध शाखा अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसे प्रश्नपत्र कैसे मिला और मामले में उसकी भूमिका क्या थी। इस मामले में अपराध शाखा की प्रापर्टी सेल पहले ही छह लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें एमपीएससी के तीन अधिकारी शामिल हैं।
आरोपितों में सहायक अनुभाग अधिकारी विश्वेश्वर दत्तात्रय नाकाटे और गोपाल भट्टू मराठे, अवर सचिव अभिजीत गणपतराव लेंडवे, नंदुरबार स्थित कौटिल्य अकादमी के निदेशक प्रवीण दिलीप पाटिल तथा कथित सह-साजिशकर्ता अमृत नामदेव पाटिल और लोकेश उर्फ गौरव राजेंद्र पाटिल शामिल हैं। ऋतुजा की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार आरोपितों की संख्या सात हो गई है।
अपराध शाखा के अनुसार, आरोपितों ने परीक्षा से पहले प्रश्नों तक पहुंच बनाई और उन्हें अलग सेट के रूप में तैयार कर अनधिकृत लोगों तक पहुंचाया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि लीक प्रश्नपत्र कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचा और इसके लिए किसी तरह का आर्थिक लेनदेन हुआ या नहीं।
पेपर लीक को लेकर एमपीएससी अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग के बीच उन्होंने बुधवार को बयान जारी कर कहा कि घटना जनवरी 2026 की है। उन्होंने बताया कि आयोग के अध्यक्ष के रूप में 18 फरवरी को उनकी नियुक्ति हुई और तीन मार्च को उन्होंने पदभार ग्रहण किया।
उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर घटना की समयावधि को ध्यान में रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कार्यभार संभालने के बाद उनका ध्यान परीक्षा एवं भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सुरक्षा मजबूत करने पर रहा है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं में लाखों युवाओं को निष्पक्ष और समान अवसर उपलब्ध कराना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।
बता दें कि ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती के लिए 29 जुलाई 2025 को विज्ञापन जारी हुआ था। 22 मार्च 2026 को राज्य के छह संभागीय मुख्यालयों पर आफलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा हुई।
12 जून को परिणाम घोषित किया गया और 506 अभ्यर्थी साक्षात्कार के लिए पात्र पाए गए। इनमें 488 ने एक से 22 जुलाई के बीच साक्षात्कार दिया। इसके बाद एमपीएससी ने 488 अभ्यर्थियों की अस्थायी सामान्य मेरिट सूची जारी की।
इनमें 485 नियुक्ति के लिए पात्र और तीन अपात्र घोषित किए गए। हालांकि, 22 से 26 जुलाई के बीच कुछ अभ्यर्थियों और जनप्रतिनिधियों ने परीक्षा के संचालन को लेकर आयोग से ई-मेल के जरिए शिकायतें की थीं। इन्हीं शिकायतों के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और कथित पेपर लीक का मामला सामने आया।