पटना : बिहार से सिनेमा और कला जगत के लिए बड़ी खबर है. राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित फिल्म समीक्षक विनोद अनुपम और चर्चित अभिनेता पंकज त्रिपाठी को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC के नए बोर्ड में सदस्य बनाया गया है. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को 18 सदस्यीय बोर्ड के पुनर्गठन की अधिसूचना जारी की है. नए बोर्ड का कार्यकाल तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, रहेगा.
सेंसर बोर्ड में बिहार के दो दिग्गज
एक ही बोर्ड में बिहार से जुड़े इन दो चर्चित चेहरों की मौजूदगी खास है. विनोद अनुपम लंबे समय से फिल्म समीक्षा, लेखन और सिनेमा से जुड़े विमर्श का हिस्सा रहे हैं, जबकि पंकज त्रिपाठी ने अभिनेता के तौर पर हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है. अब दोनों फिल्म प्रमाणन की महत्वपूर्ण संस्थागत व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाएंगे.
कौन हैं विनोद अनुपम?
विनोद अनुपम देश के चर्चित फिल्म समीक्षक, लेखक, संपादक और कला-संस्कृति से जुड़े टिप्पणीकार हैं. वह बिहार के जमालपुर के रहने वाले है. उन्होंने भारतीय सिनेमा, साहित्य और कला के क्षेत्र में लंबे समय तक लेखन किया है. फिल्म समीक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली. वर्ष 2002 में 49वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में उन्हें हिंदी के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का पुरस्कार दिया गया था. राष्ट्रीय पुरस्कार की आधिकारिक जानकारी में उन्हें Best Film Critic के तौर पर दर्ज किया गया है. उन्हें स्वर्ण कमल और 15 हजार रुपये का नकद पुरस्कार मिला था.
विनोद अनुपम की फिल्म समीक्षा में हिंदी सिनेमा में गांवों के बदलते और गायब होते चित्रण से लेकर आतंकवाद के महिमामंडन जैसे विषयों पर सवाल उठाने वाली दृष्टि को रेखांकित किया गया था. फिल्म समीक्षा के अलावा वह फिल्म संबंधी राष्ट्रीय स्तर की जूरी और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़े रहे हैं.
CBFC सदस्य बनने पर क्या बोले विनोद अनुपम?
CBFC में सदस्य बनाए जाने पर विनोद अनुपम ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है और केंद्र सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में उनका नाम शामिल है. उन्होंने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, उसका बखूबी निर्वहन करने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि फिल्मों को लेकर भारत सरकार की नीति और दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास रहेगा. तय नीतियों के अनुसार ही फिल्मों के प्रमाणन की प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाएंगे.
कौन हैं पंकज त्रिपाठी?
बिहार के गोपालगंज से निकलकर हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाले पंकज त्रिपाठी आज भारतीय फिल्म जगत के चर्चित अभिनेताओं में शामिल हैं. उनका संबंध गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव से है. पटना में पढ़ाई के दौरान उनका रुझान रंगमंच की ओर बढ़ा. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय का प्रशिक्षण लिया. फिल्मी करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने छोटे-छोटे किरदारों से शुरुआत की.
‘रन’, ‘अपहरण’, ‘ओमकारा’, ‘शौर्य’, ‘रावण’ और ‘अग्निपथ’ जैसी फिल्मों में काम करने के बाद ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से उन्हें व्यापक पहचान मिली. इसके बाद ‘फुकरे’, ‘न्यूटन’, ‘स्त्री’, ‘लुका छुपी’ और ‘मिमी’ समेत कई फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने देखा. पंकज त्रिपाठी को 69वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में फिल्म ‘मिमी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. फिल्म में उन्होंने भानु प्रताप पांडे का किरदार निभाया था. अब अभिनेता के तौर पर अपनी लंबी पारी के बाद पंकज त्रिपाठी फिल्म प्रमाणन से जुड़ी संस्थागत प्रक्रिया में भी भूमिका निभाएंगे.
18 सदस्यीय CBFC बोर्ड में कौन-कौन?
केंद्र सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक नए 18 सदस्यीय बोर्ड में विनोद अनुपम, मनोज जोशी, अभिषेक जैन, रिकी केज, प्रियदर्शन, सुनील शेट्टी, हंसराज हंस, सुप्रिया यरलागड्डा, यतिंद्र मिश्र, रूपाली गांगुली, प्रीति जिंटा, नीला माधब पांडा, पंकज त्रिपाठी, प्रोसेनजीत चटर्जी, पल्लवी जोशी, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे, रमेश पतंगे शामिल हैं.
नए बोर्ड में फिल्म और मनोरंजन जगत के साथ संगीत, रंगमंच और कला-संस्कृति से जुड़े चेहरे भी शामिल हैं. अभिनेता सुनील शेट्टी, मनोज जोशी, प्रीति जिंटा, पल्लवी जोशी, रूपाली गांगुली और प्रोसेनजीत चटर्जी, फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन, संगीतकार रिकी केज और गायक हंसराज हंस जैसे नाम इस बोर्ड का हिस्सा हैं.
क्या होता है सेंसर बोर्ड ये कैसे करता है काम?
भारत में आम बोलचाल में जिसे ‘सेंसर बोर्ड’ कहा जाता है, उसका आधिकारिक नाम केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी Central Board of Film Certification-CBFC है. यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन काम करने वाली वैधानिक संस्था है. इसका मुख्य काम सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को प्रमाणित करना है. किसी फिल्म को सिनेमाघरों में सार्वजनिक रूप से रिलीज किए जाने से पहले निर्धारित प्रमाणन प्रक्रिया से गुजरना होता है. CBFC फिल्म को निर्धारित प्रक्रिया के तहत देखने के बाद उसके लिए लागू प्रमाणन श्रेणी और नियमों के अनुसार निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है.
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 18 सदस्यीय बोर्ड के सभी सदस्य हर फिल्म को रोजाना बैठकर देखने वाली कोई स्थायी ‘सेंसर कमेटी’ नहीं होते. फिल्म प्रमाणन के लिए अलग Examining Committee बनाई जाती है. 2024 के सिनेमैटोग्राफ सर्टिफिकेशन नियमों के तहत लंबी फिल्मों के परीक्षण के लिए इस समिति में सलाहकार पैनल के सदस्य और जांच अधिकारी शामिल होते हैं. कमेटी फिल्म देखने के बाद अपनी सिफारिश देती है और उसके आधार पर प्रमाणन की प्रक्रिया आगे बढ़ती है.
जरूरत पड़ने पर मामला Revising Committee के पास भी जा सकता है. इसमें बोर्ड के सदस्य या सलाहकार पैनल के सदस्य शामिल हो सकते हैं. इस तरह CBFC के सदस्य केवल फिल्मों की स्क्रीनिंग तक सीमित भूमिका नहीं निभाते, बल्कि बोर्ड की बैठकों और फिल्म प्रमाणन व्यवस्था से जुड़े संस्थागत कामकाज में भी भाग लेते हैं. नए बोर्ड का कार्यकाल तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है. ऐसे में आने वाले तीन वर्षों के दौरान यह 18 सदस्यीय टीम फिल्म प्रमाणन से जुड़े बोर्ड के कामकाज में अपनी भूमिका निभाएगी.