मुंबई । राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष एवं सांसद सुप्रिया सुले ने केंद्र सरकार द्वारा संसद के मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधेयक के तहत होने वाले लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) में किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
वहीं, पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी इसी मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखते हुए राज्यों के साथ समान व्यवहार की मांग की है। राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि इस रुख से INDIA गठबंधन के भीतर मतभेद उभरकर सामने आए हैं।
केंद्र सरकार लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है। चर्चा है कि यह विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कुल सदस्य संख्या करीब 850 तक पहुंच सकती है। बढ़ती जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने और निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के उद्देश्य से यह विधेयक लाया जा रहा है।
सुप्रिया सुले का रुख
सुप्रिया सुले ने कहा कि जनसंख्या के अनुपात में जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ना आवश्यक है, इसलिए उनकी पार्टी इस संविधान संशोधन का समर्थन करती है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल सीटें बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि परिसीमन के दौरान सभी राज्यों के साथ समान और न्यायपूर्ण व्यवहार होना चाहिए।
शरद पवार की रणनीति
शरद पवार ने केंद्र सरकार से मांग की कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, विशेषकर दक्षिण भारत के राज्यों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि परिवार नियोजन को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम करना उचित नहीं होगा।
पवार ने यह भी कहा कि यदि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अतिरिक्त सीटें दी जाती हैं, तो जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के हितों की भी पूरी तरह रक्षा की जानी चाहिए। इसके लिए केंद्र सरकार को स्पष्ट नीति सामने लानी चाहिए।
महाराष्ट्र पर क्या असर पड़ेगा?
यदि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन होता है, तो महाराष्ट्र की लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम फैसला आगामी जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर होगा। इसलिए राज्य को कितनी अतिरिक्त सीटें मिलेंगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राजनीतिक मायने
यह विधेयक केवल लोकसभा की सीटें बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की राष्ट्रीय राजनीति और राज्यों के प्रतिनिधित्व के संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। सुप्रिया सुले और शरद पवार के समर्थन के बाद इस मुद्दे पर विपक्षी INDIA गठबंधन के भीतर अलग-अलग राय सामने आने लगी है, जिससे गठबंधन में मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।