एम्स भोपाल में इलाज का विस्तार, रोबोटिक सर्जरी से फेफड़ा ट्रांसप्लांट तक नई सुविधाएं होंगी शुरू

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भोपाल: राजधानी के एम्स में मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ इलाज और जांच की सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है. यहां रोज 6 से 7 हजार मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जबकि करीब एक हजार मरीज प्रतिदिन अलग-अलग विभागों में भर्ती हो रहे हैं.

मरीजों को आधुनिक और किफायती उपचार उपलब्ध कराने के लिए अब रोबोटिक सर्जरी, दूसरी एमआरआई और कैथ लैब, पीईटी-सीटी, गामा नाइफ और फेफड़ा प्रत्यारोपण जैसी सुविधाएं शुरू करने की तैयारी है. वहीं अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए चौबीस घंटे डिजिटल सेवाएं और मरीज मार्गदर्शन केंद्र भी विकसित किए जा रहे हैं. ये जानकारी शनिवार को एम्स भोपाल के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.)नरेंद्र कोतवाल ने दी.

रोज 7 हजार मरीज, बढ़ रहा इलाज का दबाव

डॉ. नरेंद्र कोतवाल के अनुसार, एम्स भोपाल में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. वर्तमान में प्रतिदिन करीब 6 से 7 हजार मरीज बाह्य रोगी विभाग में परामर्श और उपचार के लिए पहुंचते हैं. इसके अलावा विभिन्न विभागों में रोज करीब एक हजार मरीज भर्ती हो रहे हैं. बढ़ते दबाव को देखते हुए संस्थान ने उपचार, जांच और मरीज सुविधाओं का विस्तार शुरू किया है.

3 हृदय और 26 गुर्दा प्रत्यारोपण, अब फेफड़े की तैयारी

एम्स भोपाल में अब तक तीन हृदय और 26 गुर्दा प्रत्यारोपण किए जा चुके हैं. संस्थान के अनुसार हार्ट ट्रांसप्लांट कार्यक्रम मध्य प्रदेश में अपनी तरह का पहला कार्यक्रम है. अब फेफड़ा प्रत्यारोपण की अनुमति भी मिल चुकी है और सेवा जल्द शुरू होने की उम्मीद है. लिवर ट्रांसप्लांट की तैयारी भी चल रही है. ट्रांसप्लांट सेवाओं को मजबूत करने के लिए समर्पित ट्रांसप्लांट आपरेशन थिएटर तैयार किया गया है.

रोबोट से होगी सर्जरी, नवंबर तक शुरू होने की उम्मीद

डॉ. नरेंद्र कोतवाल ने बताया कि एम्स में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू करने की तैयारी है. दा विंची रोबोटिक सर्जिकल प्रणाली स्थापित की जा रही है और जरूरी प्रशिक्षण व नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद नवंबर 2026 तक इसके शुरू होने की उम्मीद है. इससे मूत्र रोग समेत अन्य उपयुक्त विभागों में छोटे चीरे वाली सर्जरी को बढ़ावा मिलेगा. इसके अलावा दूसरी तीन टेस्ला एमआरआई और दूसरी कैथ लैब भी स्थापित की जा रही है.

कैंसर मरीजों के लिए पीईटी-सीटी और दूसरा लिनैक

एम्स में कैंसर ट्रीटमेंट की क्षमता बढ़ाने के लिए दूसरा लिनैक लगाया जा रहा है. इससे रेडियोथेरेपी की क्षमता बढ़ेगी और मरीजों की प्रतीक्षा कम करने में मदद मिलेगी. वहीं 200 बिस्तरों वाले डेडिकेटेड कैंसर सेंटर का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है. इसके अलावा पीईटी-सीटी सुविधा 30 नवंबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है. इसकी जांच करीब 7,500 रुपए में उपलब्ध कराने की योजना है. गामा नाइफ सुविधा भी मार्च 2027 तक शुरू होने की उम्मीद है.

घर बैठे मिलेंगी अस्पताल की कई सेवाएं

मरीजों को छोटी सेवाओं के लिए अस्पताल के चक्कर लगाने से बचाने के लिए चौबीस घंटे व्हाट्सऐप आधारित मरीज सेवा शुरू की गई है. इसके जरिए ओपीडी की नियुक्ति, जांच रिपोर्ट और छुट्टी का सारांश घर से लिया जा सकेगा. जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र भी 72 घंटे में डाउनलोड किए जा सकेंगे. अस्पताल में डिजिटल चिकित्सा तस्वीरों और रिपोर्ट के लिए पैक्स प्रणाली भी लाई जा रही है.

मरीजों के साथ परिजनों की सुविधा पर भी जोर

एम्स परिसर में मरीजों और परिजनों की सुविधा के लिए नया सार्वजनिक पार्किंग परिसर तैयार है. 700 बिस्तरों वाला विश्राम गृह निर्माणाधीन है, जिसके करीब डेढ़ वर्ष में पूरा होने की उम्मीद है. पार्किंग के ऊपर बहुविशेषता केंद्र बनाने की योजना है. बड़े परिसर में मरीजों को रास्ता खोजने में परेशानी न हो, इसके लिए आईआईटी इंदौर के सहयोग से मरीज मार्गदर्शन केंद्र भी विकसित किया जा रहा है. इसके साथ डाक्टरों-कर्मचारियों के लिए आवासीय परिसर और एमबीबीएस विद्यार्थियों के लिए खेल परिसर भी तैयार किया जा रहा है.

शोध में भी बढ़ा एम्स का दायरा

एम्स भोपाल चिकित्सा शोध और नवाचार में भी आगे बढ़ रहा है. वर्ष 2025-26 में करीब 60 बाहरी वित्तपोषित शोध परियोजनाओं को अनुदान मिला. संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा हर साल करीब 450 शोध पत्र प्रकाशित किए जा रहे हैं, जबकि करीब 25 पेटेंट दाखिल या स्वीकृत हो चुके हैं. संस्थान का जोर ऐसे शोध पर है, जिन्हें भविष्य में कम लागत वाली स्वदेशी चिकित्सा सुविधाओं में बदला जा सके.

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