भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मीडिया पर बोल रहे थे. उन्होंने फेक न्यूज पर निशाना साधा और कहा कि फेक न्यूज के बजाए नेक न्यूज की आदत डालें. उन्होंने मीडिया को लेकर कहा कि आप सत्ता के विरोधी हो सकते हैं और उसमें कोई संकट भी नहीं है, लेकिन देश हित का ख्याल रखिए. वे माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के तीन दिवसीय सत्रारंभ अभ्युदय 2026 को संबोधित करते हुए बोल रहे थे. इस मौके पर विख्यात लेखक कलाकार पीयूष मिश्रा भी मौजूद थे.
फेक न्यूज नहीं नेक न्यूज की आदत डालें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पत्रकारिता के भविष्य से मुखातिब थे. वे माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में छात्रों को संबोधित कर रहे थे. इस मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया के साथ बहुत तेजी से आई फेक न्यूज की बाढ़ पर खुलकर बोला. उन्होंने कहा कि आज का पत्रकार फेक न्यूज की जगह नेक न्यूज की आदत डाले. मुख्यमंत्री ने कहा कि सनसनी तो लाएं, सत्य भी लाएं, साहस भी जुटाएं. उन्होंने कहा कि देश हित का ख्याल रखना बहुत जरुरी है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मौके पर विश्वविद्यालय के प्रकाशनों के दो सदी साक्षी में न्यूज रूम और भारत की टेंपल इकोनॉमी पर केंद्रित जरनल इंडियन कलाईडोस्कोप का विमोचन किया.
100 साल और 100 सुर्खियों का अवलोकन
उन्होंने विश्व विद्यालय द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी 100 साल से 100 सुर्खियां का अवलोकन किया. डॉ. मोहन यादव ने मीडिया को भगवान राम के काल से जोड़कर बताया. उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में भगवान राम के दो बेटे हुए. लेकिन उस समय मीडिया नहीं थी, तो बच्चों का पिता से परिचय कैसे कराएं. ये बड़ी चुनौती थी. उस वक्त महर्षि वाल्मीकि के ध्यान में आया कि बच्चों को रामायण सुनाई जाए. बच्चों को संगीतमय रामायण कंठस्थ कराने के बाद उन्हें अयोध्या पहुंचाया गया था. उसके बाद बच्चों ने जनता के जरिये अपनी बात अयोध्या तक पहुंचाई. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा यह भी पत्रकारिता का एक माध्यम रहा होगा.
सावरकर की पत्रकारिता का उदाहरण
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वीर सावरकर का जिक्र किया. आजादी के पहले बता दिया था कि पत्रकार की भूमिका क्या होती है. मुख्यमंत्री ने कहा कि लंदन में पढ़ने के साथ-साथ वो बड़ा काम करते हैं. वो सोचते हैं कि 1857 के आजादी के संघर्ष का सही पक्ष सबके सामने आना चाहिए. वे लंदन के सबसे शक्तिशाली क्षेत्र में जाकर इस बात को उजागर करते हैं. यह एक पत्रकार की ही हिम्मत हो सकती है कि वह इतने प्रभावित क्षेत्र में इस तरह की बात छापे और बताए कि 1857 का युद्ध स्वतंत्रता संग्राम का समर है, ये कोई विद्रोह नहीं है.
वीर सावरकर को दो-दो बार कालापानी की सजा हुई. इस मौके पर विख्यात लेखक-कलाकार पीयूष मिश्रा भी मौजूद थे. मिश्रा ने कहा कि भोपाल अद्भुत है. यह सबसे ज्यादा सुरक्षित शहर है. मैं बहुत सालों पहले भोपाल आया करता था. मेरी यादों में भारत भवन बसा हुआ है. मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों परिधि पुजारी, तमन्ना लश्कर और शिविका गुप्ता का उनकी उपलब्धियां के लिए सम्मान किया, उन्हें अलंकरण प्रदान किए.