मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए भाषा निदेशालय द्वारा आयोजित हिंदी भाषा परीक्षा को औपचारिक रूप से रद कर दिया है। सरकार ने इसके लिए राज्य में मराठी के आधिकारिक इस्तेमाल और सरकारी कामकाज में हिंदी की घटती अहमियत का हवाला दिया है।
मराठी भाषा विभाग ने सोमवार, 31 अगस्त को एक सरकारी आदेश (GR) जारी किया। इसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र बनने से पहले शुरू की गई परीक्षा मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के तहत अब उचित नहीं है।
महाराष्ट्र बनने से पहले शुरू हुई थी परीक्षा
जीआर के अनुसार, बॉम्बे की तत्कालीन सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया था, ताकि सरकारी कामकाज में हिंदी का इस्तेमाल आसान हो सके। हालांकि, महाराष्ट्र बनने के बाद सरकारी कामकाज के लिए मराठी भाषा का इस्तेमाल होने लगा।
सरकार ने प्रशासनिक कामकाज के बदलते तरीकों का दिया हवाला
सरकार ने कहा कि महाराष्ट्र आधिकारिक भाषा अधिनियम के प्रावधानों और प्रशासनिक कामकाज के मौजूदा स्वरूप को देखते हुए हिंदी परीक्षा जारी रखना अब जरूरी नहीं है। सरकारी आदेश में कहा गया है कि सरकारी कामकाज में हिंदी का इस्तेमाल बहुत कम हो गया है, जबकि केंद्र सरकार और अन्य राज्यों के साथ बातचीत मुख्य रूप से अंग्रेजी में होती है।
परीक्षा रद करने का फैसला सरकार के विचाराधीन था और अब 31 अगस्त के सरकारी आदेश के जरिए इसकी औपचारिक घोषणा कर दी गई है।
हिंदी परीक्षा से जुड़े पुराने आदेश भी रद
आदेश में कहा गया है कि भाषा निदेशालय द्वारा आयोजित हिंदी भाषा परीक्षा (जिसे पहले एक तय बोर्ड आयोजित करता था) अब रद कर दी गई है। परीक्षा से जुड़े सभी पुराने सरकारी प्रस्ताव, सर्कुलर, आदेश और सरकारी पत्र भी अब रद माने जाएंगे।
7 मई से पिछली तारीख से लागू होगा फैसला
खास बात यह है कि यह सरकारी आदेश 7 मई, 2026 से पिछली तारीख से लागू होगा। इसी तारीख को हिंदी भाषा की परीक्षा रोक दी गई थी। यह प्रस्ताव मंत्रालय के मराठी भाषा विभाग ने जारी किया और सोमवार को डेस्क ऑफिसर वैशाली लाहू वाघमारे ने इस पर डिजिटल हस्ताक्षर किए।
महाराष्ट्र में भर्ती परीक्षा में सुधार
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले हफ्ते राज्य की अलग-अलग सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक, सुरक्षित और आम सहमति वाले सुधार लागू करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति बनाने का फैसला किया।
समिति को निर्देश दिया गया कि वह राज्य के हर राजस्व डिवीजन का दौरा करे, छात्रों से सीधे बातचीत करे और परीक्षा प्रक्रिया में बड़े बदलाव के उपायों के बारे में एक संयुक्त रिपोर्ट सौंपे।