मुंबई। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने महाराष्ट्र सरकार की प्रमुख योजना ‘लाडकी बहिन’ के क्रियान्वयन में 3541 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च, जमा खातों में हजारों करोड़ रुपये रखने और वित्तीय प्रबंधन में कमियों को उजागर किया है।
शुक्रवार को राज्य विधानमंडल में पेश की गई कैग वित्त आडिट रिपोर्ट 2024-25 में कहा गया है कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस अतिरिक्त खर्च के लिए कोई विशिष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना के लिए स्वीकृत 29,693.09 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 33,237.24 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसके कारण 3,541.16 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च हुआ। योजना के लिए कुल 29,693.09 करोड़ रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया गया था। इसमें 26200 करोड़ रुपये अनुपूरक प्रविधानों के माध्यम से और 3,490.75 करोड़ रुपये ‘लेक लाड़की योजना’ से पुन: आवंटित किए गए।
कैग ने कहा कि आडिट जांच से पता चला है कि जनवरी और मार्च 2025 के बीच निकाली गई 15,586 करोड़ रुपये की राशि को वर्चुअल पर्सनल डिपाजिट अकाउंट (वीपीडीए) में स्थानांतरित किया गया।
बड़ी मात्रा में धनराशि की निकासी से यह संकेत मिलता है कि इन फंड की तत्काल आवश्यकता नहीं थी और वास्तविक खर्च की जरूरत के बिना ही इन्हें सरकारी खजाने से निकाल लिया गया।
इस व्यवस्था को गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए कैग ने कहा कि तत्काल आवश्यकता न होने के बावजूद धनराशि निकालकर वीपीडीए में रख देना बजटीय अनुशासन और वित्तीय शुचिता के सिद्धांतों के विपरीत है।