महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चा तेज

Parthadmin

मुंबई। सोमवार को तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से मिलने वाले हैं। उनकी इस मुलाकात के बाद की प्रगति देखकर महाराष्ट्र में भी शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) के सांसद कोई नया कदम उठा सकते हैं।

हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में चल रही भगदड़ से डरी शिवसेना (यूबीटी) ने सोमवार को ही अपने संसदीय दल की बैठक बुलाई है। पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे निवास मातोश्री पर बुलाई गई इस बैठक में उद्धव ठाकरे स्वयं सांसदों से बात कर उनके मन की भावनाएं जानने का प्रयास करेंगे।

महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की सुगबुगाहट

क्योंकि पिछले कई दिनों से चर्चा चल रही है कि यूबीटी के नौ में से सात सांसद पार्टी छोड़कर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का दामन थामने वाले हैं। इस प्रक्रिया को ‘ऑपरेशन टाइगर’ नाम दिया जा रहा है।

एकनाथ शिंदे से की थी सांसदों ने मुलाकात

पता चला है कि हाल ही में एकनाथ शिंदे की दिल्ली यात्रा के दौरान इन सांसदों ने उनसे मुलाकात की थी। इससे पहले भी सात सांसदों के पार्टी छोड़ने की चर्चा छिड़ी थी। तब दक्षिण मुंबई के सांसद अरविंद सावंत ने पत्रकारों के सामने ही एक लंबा शपथ पत्र अपने हाथ से से लिखकर गारंटी दी थी कि वह कहीं नहीं जाने वाले।

7 सांसद छोड़ सकते हैं पार्टी

यूबीटी से जुड़े सूत्रों की मानें तो मुंबई के दो सांसदों अरविंद सावंत एवं अनिल देसाई को छोड़कर बाकी सभी सांसद अपने बेहतर भविष्य की चाह में पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं। ताकि किसी न किसी रूप में सत्तापक्ष के साथ आकर अपने क्षेत्र के काम करवा सकें। जिससे अगले चुनाव में जनता के सामने जाने लायक स्थिति बन सके।

NCP (SP) में भी भगदड़ की आशंका

दूसरी ओर शरद पवार की पार्टी के भी आठ सांसदों में से अधिसंख्य पार्टी छोड़ने का मन बना रहे हैं। इस भगदड़ को रोकने के लिए ही शरद पवार किसी बेहतर दल में विलय की संभावनाएं खोज रहे हैं। एक दिन पहले ही महाराष्ट्र कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नाना पटोले यह तथ्य उजागर कर चुके हैं कि शरद पवार अपने दल राकांपा (शरदचंद्र पवार) का विलय कांग्रेस में करने का प्रस्ताव दे चुके हैं।

कांग्रेस में विलय की चर्चाएं तेज

उनके इस बयान का अभी तक कोई खंडन स्वयं शरद पवार या उनकी पार्टी की तरफ से नहीं आया है। उनकी पुत्री सुप्रिया सुले ने भी संजय राउत के एक बयान पर बोलते हुए ऐसे किसी प्रस्ताव का खंडन नहीं किया। बल्कि उन्होंने संजय राउत के बयान को ‘अच्छा सुझाव’ बताते हुए कहा कि ‘पता नहीं ऐसा होगा कि नहीं होगा’।

भाजपा के नजदीक रहना चाहते हैं सांसद-विधायक

वास्तव में शरद पवार अपनी कथित सेक्युलर विचारधारा के कारण भाजपा या राजग में जाने से परहेज कर रहे हैं। लेकिन उनकी पार्टी के अधिसंख्य सांसद – विधायक सत्ता के नजदीक रहना चाहते हैं। क्योंकि इन सभी नेताओं का कोई न कोई बड़ा व्यवसाय है। उन्हें अपने राजनीतिक हित के साथ व्यावसायिक हित भी देखने हैं।

इसी कारण पवार की पार्टी का विलय अजीत पवार की पार्टी राकांपा में होने की बात चल रही थी। लेकिन इसी साल 28 जनवरी को एक विमान दुर्घटना में अजीत पवार का निधन हो जाने के कारण विलय का मामला खटाई में पड़ गया। लेकिन पवार परिवार में खटास कम हो चुकी है।

ऐसी स्थिति में सुनेत्रा पवार और सुप्रिया सुले यदि एक बार फिर विलय की चर्चा शुरू कर दें, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। वैसे भी शरद पवार गुट के अधिसंख्य सांसदों-विधायकों को कांग्रेस के बजाय सुनेत्रा के नेतृत्ववाली राकांपा में जाना ज्यादा लाभप्रद लग रहा है। क्योंकि वह पार्टी केंद्र और राज्य में सत्ता के निकट या सत्ता में शामिल है।

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