नई दिल्ली: भारत सरकार ने शराब बनाने वाली कई बड़ी कंपनियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा शुरू की गई सख्त कार्रवाई का पूरा समर्थन किया है. स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, ओल्ड मंक, मैक्डॉवेल्स, बैगपाइपर, एंटीक्विटीू ब्लू और रॉयल चैलेंज जैसे नामी ब्रांड्स के खिलाफ खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के मामले में यह कदम उठाया गया है.
नकली फ्लेवर का खेल
मंत्रालय की जांच और लैब रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि ये कंपनियां पारंपरिक तरीके से शराब तैयार करने के बजाय शॉर्टकट अपना रही थीं. ये निर्माता केवल साधारण स्पिरिट या एक्स्ट्रा-न्यूट्रल अल्कोहल (ENA) का इस्तेमाल कर रहे थे और उसमें ऊपर से आर्टिफिशियल फ्लेवर मिला रहे थे. इस मिलावट के जरिए वे शराब में रम या व्हिस्की जैसा असली स्वाद और खुशबू पैदा कर रहे थे. FSSAI ने कहा कि इस तरह के उत्पाद न केवल घटिया स्तर के हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को गुमराह भी करते हैं.
उम्र (Ageing) के झूठे दावे
फ्लेवरिंग के अलावा, कंपनियों पर शराब की उम्र को लेकर भी भ्रामक दावे करने का आरोप है. जैसे, ओल्ड मंक के एक वेरिएंट पर ‘7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड’ लिखा गया था. FSSAI के 2018 के नियमों के मुताबिक, किसी भी ब्लेंडेड स्पिरिट की उम्र का निर्धारण उसमें मिलाए गए सबसे कम उम्र वाले स्पिरिट के आधार पर होना चाहिए.
इन ब्रांड्स और फैक्ट्रियों पर लगी रोक
लैब रिपोर्ट्स के आधार पर FSSAI ने कई राज्यों में बिक्री पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं
- मोहन रॉकी स्प्रिंगवॉटर (खोपोली): ओल्ड मंक रम वेरिएंट्स.
- यूनाइटेड स्पिरिट्स (बारामती और म.प्र.): मैक्डॉवेल्स नंबर 1 रम, एंटीक्विटी ब्लू और रॉयल चैलेंज व्हिस्की.
- इनब्रू बेवरेजेस (म.प्र.): बैगपाइपर व्हिस्की और ओल्ड कास्क रम.
इसके अतिरिक्त, गोवा की मानडेक्सी डिस्टिलरीज में भी जांच की गई है और महाराष्ट्र के 6 अन्य निर्माताओं को नोटिस जारी किया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि कॉफी या वैनिला जैसे प्राकृतिक फ्लेवर डालने की अनुमति है, लेकिन रम में ‘रम का ही फ्लेवर’ या व्हिस्की में ‘व्हिस्की का फ्लेवर’ ऊपर से मिलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है. मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि कई अन्य निर्माता अब भी सभी सरकारी मानकों का पालन कर रहे हैं.