धार/छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रावासों के हाल कैसे हैं, इसका उदाहरण छिंदवाड़ा और धार से आई तस्वीरें बता रही हैं. कहीं छात्र तो कहीं छात्राएं छात्रावास से निकलकर सड़क पर पहुंच रही हैं और अधिकारियों से अपने हक यानि हॉस्टलों और स्कूलों में व्यवस्थाएं बेहतर करनी की गुहार लगा रही हैं.
मध्य प्रदेश में एससी और एसटी जाति के छात्र और छात्राओं के लिए बनाए गए हॉस्टल के हाल किसी से छिपे नहीं हैं. आए दिन ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि कहीं हॉस्टल में कीड़े वाला खाना मिल रहा है तो कहीं हॉस्टल में शौचालय की सुविधा नहीं है तो कहीं पीने के लिए गंदा पानी मिल रहा है तो कहीं छात्रावास जर्जर हैं. अब ऐसी ही समस्याओं को लेकर प्रदेश में आए दिन छात्र और छात्राएं सड़कों पर प्रदर्शन कर रहीं है तो कहीं कई किलोमीटर पैदल चलकर अधिकारियों से व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की गुहार लगा रही हैं.
धार में सहायक वार्डन और वार्डन के बीच जमकर मारपीट
धार के गंधवानी विकासखंड से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां केसवी बालिका छात्रावास की छात्राएं न केवल जर्जर भवन और अव्यवस्थाएं के साये में रहने को मजबूर हैं, बल्कि अब उन्हें अपनी वार्डन और सहायक वार्डन के बीच की गंदी राजनीति और लड़ाई-झगड़ों का भी शिकार होना पड़ रहा है. सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहे एक वीडियो ने छात्रावास के अंदरूनी हालात की पोल खोलकर रख दी है. जिसमें दोनों जिम्मेदार महिलाएं छात्राओं के सामने ही एक-दूसरे पर चिल्लाती और अभद्र व्यवहार करती एक दूसरे को जमीन पर पटककर मारपीट करती नजर आ रही हैं.
इस वीडियो में छात्रावास की वार्डन और सहायक वार्डन के बीच तीखी बहस और हाथापाई जैसी नौबत साफ देखी जा सकती है. छात्राएं डरी सहमी खड़ी हैं और अपनी दोनों मैडमों को लड़ते देख रही हैं. इस वीडियो के सामने आने के बाद छात्रावास के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
वीडियो सामने आने के बाद छात्राएं पहुंची कलेक्टर ऑफिस
इस वीडियो के सामने आने और बदहाल व्यवस्था से तंग आकर केसवी बालिका छात्रावास की कई छात्राएं सोमवार को जयस संगठन के पदाधिकारियों के साथ धार कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं. यहां उन्होंने एसडीएम राजकुमार हलदर को ज्ञापन सौंपकर अपनी आपबीती सुनाई. छात्राओं ने आरोप लगाया कि केसवी स्थित बालिका छात्रावास का भवन काफी पुराना और जर्जर हो चुका है. छत से पानी टपकता है, दीवारें कमजोर हैं और कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है. जर्जर भवन से सुरक्षा को लेकर वे हमेशा चिंता में रहती हैं.
छात्राओं ने वार्डन पर कथित दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि वार्डन का व्यवहार उनके प्रति बेहद संवेदनहीन है. खाने में भी बगैर प्याज की पानी वाली सब्जी दी जाती है. कभी भी फल नहीं दिए जाते जबकि वार्डन कई किलो फल खरीदकर लाती हैं. छात्राओं का कहना है कि सहायक वार्डन मैडम ने जब छात्राओं का पक्ष लिया तो वार्डन ने उनके साथ मारपीट की. ऐसे में हमारी मांग की जर्जर हॉस्टल में व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं और वार्डन मैडम को हटाया जाए.
‘समस्याएं दुरुस्त नहीं हुई तो होगा आंदोलन’
केसवी बालिका छात्रावसा की छात्राएं जयस संगठन के साथ शिकायत करने कलेक्टर कार्यालय पहुंची थीं. जयस संगठन के जिला अध्यक्ष चिंटू गिरवाल ने बताया, “छात्रावास में कई समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं, जिसे प्रशासन नजरअंदाज कर रहा है. हॉस्टल में छात्राओं को शौचालय और नहाने की भी ठीक से व्यवस्था नहीं है. यदि छात्रावास भवन की समस्या और वार्डन-सहायक वार्डन के कथित दुर्व्यवहार पर जल्द ही सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए विवश होगा. जर्जर भवन और लड़ाई-झगड़ों के बीच फंसी इन छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है.”
प्रशासन ने दिए जांच के निर्देश
छात्राओं की शिकायत और वायरल वीडियो की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम राजकुमार हलदर ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को छात्रावास का निरीक्षण करने और मामले की तुरंत जांच करने के निर्देश दिए हैं. एसडीएम ने छात्राओं को भरोसा दिलाया कि जांच के बाद तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.
छिंदवाड़ा में ट्राइबल हॉस्टल्स में अव्यवस्थाओं से छात्राएं परेशान
छिंदवाड़ा के शासकीय ट्राइबल्स हॉस्टल्स में भी कई अव्यवस्थाएं हैं. सोमवार को थाने पहुंचकर छात्राओं का धरना देना और हॉस्टल अधीक्षक को हटाने का मुद्दा तूल पकड़ चुका है. आदिवासी हॉस्टल में रहने वाले छात्र और छात्राएं लगातार हॉस्टल अधीक्षकों की मनमानी से परेशान हैं. कहीं हॉस्टल में अव्यवस्थाएं हैं तो कहीं छात्रावास में मिलने वाले खाने से परेशान हैं.
इसके पहले भी दो बड़े मामले सामने आ चुके हैं. जिसमें एकलव्य आवासीय विद्यालय तामिया में खराब खाना और भरपेट नहीं मिलने के कारण छात्रों ने सड़क जाम कर विरोध जताया था. इसके अलावा न्यूटन चीखली के अनुसूचित जाति छात्रावास की लड़कियों ने खाने में इल्ली निकलने की शिकायत को लेकर रैली निकाल कर हाथों में गंदा खाना लेकर विरोध प्रदर्शन किया था.
तीसरा मामला जिला मुख्यालय के कन्या शिक्षा परिसर के हॉस्टल का है, यहां की छात्राएं स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले थाने में जाकर धरना देने बैठ गईं थी. जब मामले में प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो वे सोमवार को एक बार फिर हॉस्टल से निकलीं और थाने में बैठ गईं.
हॉस्टल वार्डन को हटाने की मांग, छात्राओं का थाने में धरना-प्रदर्शन
छिंदवाड़ा में आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली कई छात्राएं सोमवार को पुलिस थाने पहुंची और वहां जाकर धरना देनी लगीं. छात्राओं की सिर्फ एक ही मांग थी कि सबसे पहले यहां की हॉस्टल वार्डन को हटाया जाए. छात्राओं का आरोप था कि हॉस्टल की वार्डन उनके साथ आए दिन मारपीट के साथ अभद्रता करती हैं.
हॉस्टल की छात्राएं स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले भी थाने पहुंची थीं और हॉस्टल वार्डन को हटाने की मांग की थी लेकिन जब पुलिस और प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया तो सभी छात्राएं सोमवार की शाम करीब 5:00 बजे हॉस्टल से निकलकर कुंडीपुरा पुलिस थाने की धर्म टेकड़ी पुलिस चौकी पहुंचीं और धरने पर बैठ गईं.
दूसरी बार धरने के बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे
आदिवासी कन्या शिक्षा परिसर के हॉस्टल के छात्राओं ने दूसरी बार थाने में धरना दिया तब जाकर अधिकारियों की नींद खुली और वे थाने पहुंचे. मौके पर अधिकारियों ने जाकर मामले को शांत कराया. छात्राओं का आरोप था कि हॉस्टल वार्डन उनके साथ मारपीट करते हुए गाली गलौज करती हैं. वार्डन हम छात्राओं को पढ़ाई भी नहीं करने देतीं, इन्हें तुरंत हटाया जाए.
जनजतीय सहायक आयुक्त ने किया सस्पेंड
इस मामले में मौके पर जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र सिंह मरकाम पहुंचे और उन्होंने वार्डन को सस्पेंड कर दिया. सहायक आयुक्त ने बताया, “अगर हॉस्टल से बच्चे बाहर जाते हैं तो इसकी जिम्मेदारी हॉस्टल अधीक्षक की होती है. इसलिए सबसे पहले अधीक्षक को सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं छात्राओं की शिकायत के मामले की जांच की जा रही है. अधीक्षक का कहना है कि यहां जो पहले हॉस्टल वार्डन थीं उनके पक्ष में पहुंचे थे जबकि उन्हें उनकी मूल पदस्थापना में भेजा गया था. छात्राओं को समझाइश दी गई है.