मुंबई। मुंबई उच्चन्यायालय ने शनिवार को ठाणे जिले के एक नगर निगम अस्पताल में डॉक्टरों पर हमला करने के आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे को निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत पर रोक लगा दी और उन्हें रविवार शाम तक पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ ने शनिवार को एक विशेष सुनवाई करते हुए इस मुद्दे की ‘गंभीरता’ को ध्यान में रखते हुए समाचार रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया। जबकि ठाणे जिले की एक अदालत ने 14 जुलाई को कल्याण-डोम्बिवली नगर निगम (केडीएमसी) के पार्षद म्हात्रे को जमानत दे दी थी।
म्हात्रे और उनके सहयोगियों को छह जुलाई की रात को डोम्बिवली के एक सरकारी अस्पताल में दो डॉक्टरों और नर्सों पर कथित तौर पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। यह घटना तब हुई जब एक परिवार को नवजात शिशु को दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित करने की सलाह दी गई थी।
उच्च न्यायालय ने कल्याण अदालत द्वारा म्हात्रे को जमानत देने के आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि मजिस्ट्रेट अदालत ने मामले को बहुत हल्के में लिया और म्हात्रे के आपराधिक इतिहास पर बिल्कुल भी विचार नहीं किया। उच्च न्यायालय ने म्हात्रे को रविवार शाम तक पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया, ऐसा न करने पर उनकी अचल संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
पीठ ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि अतीत में म्हात्रे के खिलाफ मारपीट के 18 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि उन्हें उनमें से 17 में बरी कर दिया गया था। म्हात्रे के आचरण के समग्र प्रभाव और चिकित्सा पेशेवरों पर इसके पड़े असर को देखते हुए, अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया मजिस्ट्रेट को ऐसा आदेश पारित नहीं करना चाहिए था।
पीठ ने इस बात पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि मजिस्ट्रेट ने म्हात्रे को संबंधित पुलिस स्टेशन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने या पुलिस जांच में सहयोग करने का निर्देश तक नहीं दिया। हमारा मानना है कि इस आदेश पर रोक लगाई जानी चाहिए और अगली सुनवाई तक इसे स्थगित रखा जाना चाहिए।
पीठ ने म्हात्रे के साथ मामला दर्ज किए गए चार अन्य हमलावरों को दी गई जमानत भी रद कर दी। म्हात्रे और उनके सहयोगियों को दी गई जमानत रद करते हुए, न्यायाधीशों ने डॉक्टरों से हड़ताल का सहारा न लेने की अपील की।
महाराष्ट्र भर के डॉक्टरों ने म्हात्रे और उनके सहयोगियों को जमानत मिलने के बाद 22 जुलाई को काम पर न जाने की घोषणा की थी। अदालत ने कहा कि हम सरकारी और नगर निगम के अस्पतालों में कार्यरत सभी डॉक्टरों से समाज के व्यापक हित में और मानवता के प्रति अपनी सेवा को ध्यान में रखते हुए हड़ताल शुरू करने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील करते हैं।