बालाघाट। एथनॉल उत्पादन के नाम पर हुई फोर्टिफाइड चावल घोटाला मामले में एसआईटी छिंदवाड़ा के 12 वेयरहाउस मालिकों के बयान ले रही है।
एसआईटी की जांच की भनक लगते ही महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कई राइस मिल और गोदाम मालिक फरार हो गए हैं। जिनकी धरपकड़ के लिए एसआईटी का विशेष दल इन राज्यों में दबिश दे रहा है।
पूछताछ की अगली कड़ी में बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा के अलावा महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ की मिलों व गोदाम संचालकों के नाम जुड़ सकते हैं। एवीजे एथनाल प्लांट प्रबंधन की कारगुजारी इन्हीं वेयरहाउस मालिकों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे दस्तावेज से सामने आने की बात कही जा रही है।
एथनॉल प्लांट प्रबंधन ने वेयरहाउस में चावल के स्टाक को भंडारित करके रखा था। जांच के लिए प्रत्येक वेयरहाउस मालिक से तीन से चार रजिस्टर जब्त किए जा रहे हैं, जिसमें चावल के स्टाक का पूरा लेखा-जोखा है। अब तक 45 से अधिक रजिस्टर एसआइटी ने जब्त कर लिए हैं। मामले में आरोपितों की संख्या बढ़ सकती है।
पूर्व सांसद ने कहा-कांग्रेस के विधायक चुप क्यों पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने अपनी ही विधायक पत्नी अनुभा मुंजारे सहित कांग्रेस और भाजपा नेताओं पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रेसवार्ता में पूर्व सांसद मुंजारे ने कहा, चावल की हेराफेरी बड़ा घोटाला है। जिले में कांग्रेस के चार विधायक हैं, लेकिन सभी घोटाले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे और वारासिवनी विधायक विवेक विक्की पटेल औपचारिकता निभाने के लिए प्लांट का दौरा करके आ गए, जबकि विधानसभा में इस मुद्दे को नहीं उठाया।
जबलपुर में अटका 32 लाख क्विंटल धान का भंडार
एथनॉल के नाम पर की जा रही गड़बड़ी का असर अब जबलपुर में दिखाई देने लगा है। जिले में 30 जून से धान मिलिंग पूरी तरह ठप है। निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी शासन ने मिलिंग अवधि बढ़ाने या आगे की प्रक्रिया को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश जारी नहीं किए हैं।
नतीजन जिले के विभिन्न वेयरहाउसों में करीब 32 लाख क्विंटल धान का भंडार अटक गया है। आशंका है कि यदि एफसीआइ ने चावल जमा करने की तिथि बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया तो लंबे समय तक भंडारण के कारण धान की गुणवत्ता प्रभावित होने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर असर पड़ेगा।
जबलपुर, बालाघाट और सिवनी से हर साल धान खरीदी कर राइस मिलों में मिलिंग के बाद चावल एफसीआइ को सौंपा जाता है। 30 जून तक मिलिंग पूरी कर चावल एफसीआइ में जमा करना था। जिले की अधिकांश मिल बंद हैं और धान का उठाव भी रुक गया है।