भोपाल: फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को बड़ी राहत मिली है. अनुसूचित जाति मामलों की राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने मामले की जांच के बाद प्रतिमा बागरी को क्लीन चिट दे दी है. समिति ने अपनी रिपोर्ट में मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को वैध माना है. जांच समिति ने शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार द्वारा पेश की गई आपत्तियों को भी तथ्यों से परे मानते हुए अमान्य कर दिया है और पूरे प्रकरण का खत्म कर दिया है. उधर शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार के मुताबिक इस मामले में वे आगे तक लड़ाई जारी रखेंगे.
रिपोर्ट में बागरी जाति को
रिपोर्ट में कहा गया है कि, इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी नागौद द्वारा प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र को वैघ माना है. भारत सरकार द्वारा 30 अगस्त 2007 में संशोधित अधिसूचना जारी की गई थी, इसमें बागरी/बागडी (बागरी, बागडी में राजपूत, ठाकुर उपजातियों को छोड़कर) पूरे प्रदेश के लिए अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है. जांच रिपोर्ट में बताया गया कि सतना जिला की बागरी जाति को बागरी/बागड़ी में राजपूत और ठाकुद उपजाति में होने के कोई प्रमाण नहीं हैं.
समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में माना कि शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार द्वारा ऐसा कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि प्रतिमा बागरी अनुसूचित जाति की बागरी न होकर राजपूत और ठाकुर वाली बागरी हैं. जांच समिति ने जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर साल 2004 और 2018 में जारी किए गए जाति प्रमाण पत्रों को सही माना है और प्रदीप अहिरवार की आपत्ति को खारित कर दिया गया है.
समिति बोली जिले की सीमा नहीं होती लागू
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि, जाति प्रमाण पत्र में किसी भी जिले की सीमा या प्रतिबंध लागू नहीं होता है. प्रतिमा बागरी का परिवार साल 1950 से पहले से ग्राम वसुधा तहसील नागौद सतना में रहा रहा था और बाद में परिवार ग्राम हरदुआ मझोल में जाकर बस गया. राजस्व रिकॉर्ड में भी प्रतिमा बागरी के परदादा रामगोपाल बागरी का नाम 1958-59 के रिकॉर्ड में बागरी जाति के रूप में दर्ज पाया गया है. छानबीन समिति ने 6 जुलाई को जाति प्रमाण पत्र के मामले में सुनवाई की थी. इस दोनों शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार और राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने समिति के सामने अपना पक्ष रखा था.