शहडोल: शहडोल जिला भले ही आदिवासी बहुल इलाका है लेकिन यहां रहने वाले लोग अक्सर कुछ ऐसी चीज करते हैं, जो सुर्खियां बन जाती हैं. इन दिनों शहडोल जिले में लाई गई विशेष प्रजाति की छोटी गाय सुर्खियां बनी हुई है और लोग उसे देखने पहुंच रहे हैं. इतना ही नहीं इसे देखने और सेल्फी लेने के लिए लोग व्याकुल रहते हैं क्योंकि संभाग में पहली बार इस तरह की गाय कोई लाया है. हालांकि मोबाइल और दूसरी चीजों के माध्यम से इस गाय के बारे में लोग सुनते रहे हैं जानते रहे हैं, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से पहली बार लोग इस क्षेत्र में देखने को पा रहे हैं.
आंध्र प्रदेश से स्पेशल गाय
शहडोल जिला मुख्यालय के रहने वाले लीलाधर खोडियार बताते हैं वो पिछले 50 सालों से ज्यादा समय से शहडोल में रह रहे हैं और अभी हाल ही में आंध्र प्रदेश से छोटे नस्ल वाली गाय लेकर आए हैं, जिसकी हाइट लगभग ढाई फीट से ज्यादा नहीं होती है. इसमें एक मेल है और एक फीमेल है. इन्हें सिर्फ गौ सेवा के मकसद से लेकर आए हैं, जिससे उनकी गौ सेवा कर सकें. यह एक नई गोवंश की प्रजाति है जिन्हें घर में रखना उसकी देखभाल करना भी आसान है.
स्पेशल गाय का कैसे रख रहे ख्याल
लीलाधर खोडियार बताते हैं कि जो गोवंश का जोड़ा लेकर वो आए हैं इसमें जो फीमेल है उसकी उम्र लगभग 11 महीने की है और दूसरा जो मेल है वह 8 महीने का है और जैसा कि वहां के डॉक्टर ने उन्हें बताया है, जिन्होंने इस नस्ल को तैयार किया है कि 8 से 12 महीने के बीच में इनका गर्भाधान का पीरियड रहेगा.
गाय का डाइट प्लान दिया गया है
लीलाधर खोडियार बताते हैं कि वहां के डॉक्टर का नंबर हम लोग रखे हुए हैं और जहां तक डाइट की बात है तो वहां से हमें एक लिस्ट दी गई है, जिसमें सबकुछ लिखा हुआ है, कब क्या और कितनी मात्रा में देनी है. हालांकि डाइट उनकी लगभग वैसी ही रहती है जैसे सामान्य गाय की होती है, बस इनमें मात्रा कम लगती है, क्योंकि इनकी साइज बहुत छोटी होती इनका पेट भी छोटा होता है. इसको हम लोग सिर्फ सेवा भाव से लेकर आए हैं जैसे लोग दूसरे जीव घर में रखते हैं ठीक वैसे ही हम सेवा भाव से गौ माता को लेकर आए हैं. उन्होंने 1 महीने का डाइट प्लान दिया है.
हालांकि, जो लोकल चारा मिलता है, भूसी हो गई हरी पत्तियां हो गई मक्का के दाने हो गए वही सब खिला रहे हैं. लोकल डॉक्टर को भी दिखाया है वह भी आकर देखा गये हैं बछड़े को थोड़ा बुखार था सफर की वजह से तो इंजेक्शन भी लगाया है बाकी अभी ठीक है.
कब कैसे और कितने खर्च में लाये
लीलाधर खोडियार बताते हैं कि इसे वह आंध्र प्रदेश से कार में लेकर आए हैं, वह कहते हैं कि सफर में थोड़ी बहुत परेशानी तो होती है, लेकिन सावधानीपूर्वक हम इन्हें लेकर आ गए. इसे पिछले गुरुवार को वो लेकर आए हैं, वो बताते हैं उनको वहां से खरीदने और यहां तक लाने में लगभग तीन से साढ़े तीन लाख तक का खर्चा हो चुका है.
जहां तक यहां के एटमॉस्फेयर में सरवाइव करने की बात है तो उसे लेकर वह बताते हैं कि एक हफ्ते हो रहे हैं, ये अच्छे से रह रहे हैं कोई दिक्कत नहीं आई है. वहां तो समुद्र का किनारा है, तो ज्यादा गर्मी पड़ती है. यहां का वातावरण फिर भी वहां से बेहतर है. इसलिए वो बहुत मजे से रह रहे हैं और उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं आ रही है.
देखने आ रहे, सेल्फी ले रहे
इस विशेष प्रजाति के गौवंश को लेकर लोगों में भी कौतूहल का विषय है, जो भी जान रहा है वही देखने पहुंच रहा है. इन गोवंश का छोटा कद इन्हें बहुत खास बनाता है यह पूरे घर में स्वतंत्र रूप से विचरण करते रहते हैं. कभी आंगन में कभी कमरों में तो कभी छत पर उनकी अठखेलियां लोगों को काफी प्रभावित कर रही हैं.
लीलाधर खोडियार बताते हैं वर्तमान में इनकी लंबाई ऊंचाई 2 फीट के लगभग है और उनके पूर्ण विकसित होने के बाद भी इनकी लंबाई ढाई से 3:30 फीट के बीच रहने की बात कही जा रही है. लीलाधर खोडियार कहते हैं इन गौवंश को यहां लाने का मुख्य मकसद व्यापार करना नहीं है, बल्कि सिर्फ गौ सेवा करना है. गोवंश प्रेम है, उन्हें अपने परिवार के बच्चों की तरह ये ख्याल रखते हैं.
क्यों खास होती हैं ये गाय
बता दें कि इस विशेष नस्ल की गाय को पुंगनूर नस्ल की गाय कहते हैं, ये अपने कद को लेकर ही अनूठी और चमत्कारी होती हैं. इसमें कई विशेषताएं भी पाई जाती हैं इसका छोटा आकर इसकी अनोखी बनावट इसे सामान्य गाय से अलग करती है. आजकल देश भर में ये गाय ट्रेंड में है. गाय की ये नस्ल आंध्र प्रदेश में पाई जाती है दुनिया की सबसे छोटी कूबड़ वाली गायों की नस्ल में से एक होने के कारण ये गाय बेहद खास भी मानी जाती है.