ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर के चिकित्सा इतिहास में रविवार को एक नई उपलब्धि जुड़ गई है. ग्वालियर चंबल अंचल में पहली बार किडनी ट्रांसप्लांट का सफल ऑपरेशन हुआ है. एक 55 साल की पत्नी अपने 60 साल के पति के लिए सावित्री बनकर उसे यमराज के चंगुल से बचा लाई है. इसके साथ ही अब लोगों को इलाज के लिए दिल्ली-मुंबई के चक्कर नहीं लगना पड़ेगा, उन्हें ग्वालियर में ही इलाज मिल जाएगा. इससे पैसे और टाइम दोनों बचेगा.
रविवार को हुआ सफल ऑपरेशन
ग्वालियर चंबल अंचल में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को अब इंदौर या दिल्ली भागने की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि उन्हें अब इसका फायदा ग्वालियर में ही मिल रहा है. जिस पर रविवार को हुए पहले किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन ने मुहर लगा दी है. ये ऑपरेशन ग्वालियर के जया आरोग्य अस्पताल समूह के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में सफलतापूर्वक पूरा किया गया. ये अंचल में होने वाला पहला किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन था.
बुजुर्ग की किडनी खराब हुई तो पत्नी बनी डोनर
असल में कुछ समय पहले छतरपुर के रहने वाले 60 साल के बुजुर्ग कृष्णकांत गुप्ता की दोनों किडनियां खराब हो गई थीं. और सिर्फ 10 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही थी. उनका इलाज जयारोग्य अस्पताल में चल रहा था. डॉक्टर्स ने उनकी जान बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट करने का फैसला लिया. लेकिन समस्या थी डोनर की. जिस पर मरीज कृष्णकांत की पत्नी मीरा ने अपने पति की जान बचाने के लिए अपनी एक किडनी देने का फैसला किया.
सर्जरी से पहले सुनिश्चित की प्रक्रिया
सर्जरी करने से पहले मरीज और डोनर की आवश्यक मेडिकल जांच, काउंसलिंग और ट्रांसप्लांट से संबंधित सभी जरूरी प्रक्रियाएं निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार पूरी की गईं. इसके बाद सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में रविवार सुबह करीब 8.30 बजे किडनी ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन शुरू हुआ. सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञों ने मणिपाल हॉस्पिटल के यूरोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. विकास जैन के सहयोग से इस जटिल और महत्वपूर्ण ऑपरेशन को पूरा किया गया.
छह घंटे चला ऑपरेशन, दिल्ली से बुलाये विशेषज्ञ
करीब साढ़े छह घंटे तक चले इस ऑपरेशन को दोपहर 3 बजे सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया. सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की इंचार्ज डॉ. नीलिमा टंडन के मुताबिक, “ग्वालियर चम्बल अंचल में किडनी ट्रांसप्लांट का यह यह पहला ऑपरेशन किया गया है. इसके लिए दिल्ली से विशेषज्ञ डॉ. विकास जैन आये थे. जिन्होंने इस ऑपरेशन को लीड किया. सर्जरी सफल रही है.
एक हफ्ते तक ऑब्जर्वेशन में रहेंगे मरीज और डोनर
फिलहाल डोनर और रिसीवर यानी मरीज दोनों को ही ऑब्जर्वेशन में रखा गया है. अगले करीब एक हफ़्ते तक इनकी मॉनिटरिंग और ट्रीटमेंट चलेगा. क्योंकि डोनर का ऑर्गन ट्रांसप्लांट के बाद नई बॉडी में किस तरह रियेक्ट करेगा वो ठीक तरह से अपना कम करता है या नहीं. ये सभी टर्म अगले कुछ दिनों में ऑब्जर्व किए जाएंगे.
दिल्ली-इंदौर की भागदौड़ से मिलेगी निजात
डॉ. नीलिमा टंडन के मुताबिक, चूंकि ट्रांसप्लांट की वजह से जो इंटरनल घाव भी है उन्हें रिकवर करने में भी समय लगेगा. इसलिए मरीज और डोनर दोनों को ऑब्जरवेशन में ही रखा जाएगा. सात दिनों तक मेडिसिन, नेफ्रोलॉजी और एनेस्थीसिया विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की विशेष निगरानी में रखा जाएगा.” साथ ही उनका कहना है कि, ”यह ऑपरेशन ग्वालियर चंबल अंचल के लिए एक बड़ी उपलब्धि और राहत है. क्योंकि अब तक इस अंचल में कभी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किए गए. मरीजों को या तो इंदौर या दिल्ली भागना पड़ता था. लेकिन अब उनके लिए इलाज और सर्जरी का विकल्प ग्वालियर में ही उपलब्ध है.”
संक्रमण से सुरक्षा के लिए स्पेशल आईसीयू
किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को संक्रमण से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है. इसे ध्यान में रखते हुए सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में मरीज कृष्णकांत गुप्ता के लिए स्पेशल आईसीयू की व्यवस्था की गई है. जिसमें सेंट्रलाइज्ड एसी सिस्टम होने के बावजूद स्पेशल आईसीयू में अलग से एसी की व्यवस्था की गई है, ताकि संक्रमण के खतरे को कम से कम रखा जा सके. साथ ही मरीज के कमरे में भी डॉक्टरों और अधिकृत चिकित्सा स्टाफ के अलावा किसी दूसरे व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जायेगी.