टीकमगढ़: बुंदेलखंड के युवा हर क्षेत्र में जलवा बिखेर रहे हैं. क्रांति गौड़ इंटरनेशनल क्रिकेट में तो यामिनी मौर्य ने जूडो में काॅमनवेल्थ प्रतियोगिता में रजत पदक हासिल किया है. ऐसे ही टीकमगढ़ के युवा आशुतोष त्रिपाठी तो हिमालय की चोटियों को पारकर बुंदेलखंड का नाम रोशन कर रहे हैं. दरअसल, जम्मू कश्मीर में हर साल हिल्स क्लाइंबिंग के अंतर्गत हिल्स मैराथन का आयोजन किया जाता है. जिसमें पिछले दो बार में 21 किमी की रेस जीत चुके आशुतोष त्रिपाठी ने इस बार 50 किमी हिल्स मैराथन में जलवा बिखेरा है.
ये प्रतियोगिता जीतने के लिए उन्होंने बुंदेलखंड की भारी गर्मी में दोपहर में प्रैक्टिस की, ताकि उन्हें हिमालय के पहाड़ की चोटियां पार करते समय सांस फूलने की समस्या ना हो और इस बार 50 किमी की रेस जीतकर बुंदेलखंड ही नहीं मध्य प्रदेश का नाम रोशन करने का काम किया है.
कौन हैं आशुतोष त्रिपाठी
हिमालय की चोटियों पर अपने हौसलों की उड़ान भरने वाले आशुतोष त्रिपाठी की बात करें, तो ये टीकमगढ़ के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल कुंडेश्वर धाम के पंडित बृजमोहन त्रिपाठी के बेटे हैं. इनको बचपन से ही एडवेंचर का शौक है और हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों को पार करने का इनका सपना रहा है. इन्होंने इस बार अपनी मेहनत और हुनर के दम जम्मू कश्मीर में हिल्स क्लाइंबिंग (पहाड़ियों पर होने वाली मैराथन रेस) में भाग लेकर पहला स्थान हासिल किया है. खास बात ये है कि इसके पहले दो बार भी वो इसी प्रतियोगिता में जलवा बिखेर चुके हैं.
दो बार 21 किमी की रेस, अब 50 किमी की रेस में बिखेरा जलवा
जहां तक आशुतोष की बात करें, तो हिमालय की चोटियों के छूने के जुनून के चलते वो लगातार 2017 से इन प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहे हैं. सबसे पहले उन्होंने 2017 मे 21 किलोमीटर की जीती थी. जिसमें करीब 700 खिलाड़ियों के बीच उन्होंने मुकाबला जीता था. दूसरी प्रतियोगिता मई 2024 में 21 किमी की जीती थी. जिसमें करीब 500 खिलाड़ियों ने भाग लिया था. फिर तीसरी प्रतियोगिता हाल ही में जुलाई 2026 मे 50 किलोमीटर की जीती, जिसमें करीब 1000 खिलाडियों ने हिस्सा लिया था. इन्होंने सारी रेस जम्मू,पहलगांव ऒर पटनीटांप मे जीती है.
पहाड़ चढ़ने में परेशानी ना हो, गर्मी की दोपहर में की प्रैक्टिस
आशुतोष त्रिपाठी ने अपना जुनून पूरा करने के लिए काफी कड़ी मेहनत की. उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल करने के लिए टीकमगढ़ में भीषण गरमी के दौरान भरी दोपहर में प्रैक्टिस की. वो टीकमगढ़ के सिविल लाइन स्थित ग्राउंड पर दोपहर में तब प्रैक्टिस करते थे, जब तापमान 45 डिग्री के आसपास होता था. इस कारण उन्हें हिमालय की चोटियों पर दौड़ते वक्त सांस फूलने की दिक्कत नहीं हुई और उन्होंने 50 किमी मैराथन जीतने का काम किया.
सुबह तीन बजे से दौड़ने की प्रैक्टिस
कुंडेश्वर धाम मंदिर के प्रधान पुजारी बृजमोहन त्रिपाठी और उनकी पत्नी सुनीता त्रिपाठी अपने बेटे की जीत पर काफी खुश हैं. उनका कहना है कि, ”हमारे बेटे ने हिमालय की विशाल चोटियों पर अपने हौसले की जजबा दिखाया है.” आशुतोष की मां सुनीता त्रिपाठी कहती हैं कि, ”उनके बेटे ने काफ़ी मेहनत की. पिछले पांच छह साल से वह लगातार मेहनत कर रहा है. सुबह तीन बजे उठकर ग्राउंड पर रनिंग के लिए चला जाता है. उसने तीन साल की कठिन मेहनत और परिश्रम से मुकाम हासिल किया है.”
मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता
आशुतोष का कहना है कि, ”मुझे बचपन से जुनून था, लेकिन मौका नहीं मिलता था. अब जब मुझे मौका मिला, तो मैंने अच्छे से कर दिखाया. हमने 21 किमी हाॅफ हिल मैराथन जीती है. मैंने माइनस 4 डिग्री तापमान पर 50 किमी पहलगाम में जीती थी. अभी हाल ही में पटनीटाॅप में जीत हासिल की है. मुझे किसी चीज से डर नहीं लगता है. मैंने कम्पटीशन जीतने के लिए यहीं पर सिविल लाइन के ग्राउंड पर गर्मी में 45 डिग्री तापमान पर प्रैक्टिस के कारण वहां चढ़ाई के दौरान सांस फूलने की दिक्कत नहीं हुई है.” आगे अपने लक्ष्य के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि, ”वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए 24 हाॅवर चैलेंज होता है. जिसमें सिर्फ चार लोग आखिर में सिलेक्ट होते हैं, उसके लिए तैयारी कर रहा हूं. इसके साथ 100 किमी और 160 किमी की मैराथन पूरा करना चाहता हूं.”