बोरीवली मॉल में सेल्सवुमन को जबरन चूमने वाले आरोपी को 1 साल की सजा

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मुंबई। मुंबई की एक सत्र अदालत ने बोरीवली के मॉल में काम करने वाली सेल्सवुमन को जबरन चूमने के आरोप में 34 वर्षीय क्लीनर रितेश अरमुल्ला को एक साल के कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने बचाव में कहा था कि वह गलती से पीड़िता के ऊपर फिसल कर गिर गया था, लेकिन अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

न्यायाधीश ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति फिसलकर किसी अन्य पर गिरता भी है, तो उसकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया उस व्यक्ति को चूमने की नहीं होती है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.ए. साने ने पीड़िता की गवाही को पूरी तरह से भरोसेमंद माना।

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कारण या सुबूत रिकॉर्ड में नहीं है जिससे साबित हो कि पीड़िता आरोपी को पहले से जानती थी या वह उसे किसी झूठे केस में फंसाना चाहती थी।

अदालत ने माना कि यह कृत्य पूरी तरह से जानबूझकर किया गया था और आरोपी ने स्पष्ट यौन इरादे से अवांछित शारीरिक संपर्क बनाया।

भारतीय न्याय संहिता के तहत सजा का एलान

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह लागू हुई नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज शुरुआती दोषसिद्धियों में से एक है।

अदालत ने आरोपी को बीएनएस की धारा 74, जो महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से आपराधिक बल के प्रयोग से संबंधित है, के तहत एक साल के कठोर कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।

इसके साथ ही, धारा 75 (यौन उत्पीड़न) के तहत एक साल के साधारण कारावास और 500 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत के आदेशानुसार दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी और आरोपी द्वारा हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

मॉल में हुई थी छेड़छाड़ की घटना

यह घटना 17 सितंबर 2025 को बोरीवली वेस्ट के एक मॉल में घटी थी। शाम करीब 6 बजे पीड़िता अपनी ड्यूटी के दौरान एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल लेकर बिलिंग काउंटर की तरफ जा रही थी।

तभी गुलाबी शर्ट पहने आरोपी ने उससे वॉशरूम का रास्ता पूछा। पीड़िता के दिशा बताने के बावजूद, वह लगातार जिद करने लगा कि वह उसे वहां तक छोड़कर आए।

जब पीड़िता ने उसकी बात अनसुनी कर दी और आगे बढ़ गई, तो आरोपी ने पीछे से आकर उसे धक्का मारा और जबरन चूम लिया।

पीड़िता के नीचे गिरने पर उसने इस कृत्य को दोबारा दोहराया। इसके तुरंत बाद मॉल के कर्मचारियों और अन्य लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

पुलिस ने की थी त्वरित कार्रवाई

घटना के दिन ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली थी। पुलिस ने मौके का पंचनामा किया, सीसीटीवी फुटेज जुटाए और 11 नवंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद 4 जुलाई 2026 को आरोपी पर आरोप तय किए गए।

महज दो महीने तक चले इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, एक चश्मदीद गवाह, जांच अधिकारी और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े एक कर्मचारी को पेश किया।

बचाव पक्ष ने घटना को महज एक हादसा बताते हुए इरादे और सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्यों पर सवाल उठाए थे, लेकिन अदालत ने चश्मदीद और पीड़िता के मौखिक सबूतों को पर्याप्त और भरोसेमंद मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।

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