हैदराबाद : भारत के टेलीकॉम और स्पेस सेक्टर में एक बड़े नीतिगत बदलाव के तहत, देश में कमर्शियल सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं की शुरुआत का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अंतर-मंत्रालयी सचिवों के समूह ने भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर दी गई सिफारिशों को आधिकारिक मंजूरी दे दी है.
टेलीकॉम विभाग के वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से यह खबर दी गई है. इस मंजूरी के बाद अब फाइल को केंद्रीय कैबिनेट की आगामी बैठक में अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा. कैबिनेट की मोहर लगते ही देश में प्रशासनिक आधार पर सैटेलाइट स्पेक्ट्रम की फीस और आवंटन की नीति कानूनी रूप से लागू हो जाएगी.
मुख्य बिंदु और रणनीतिक प्रभाव
प्रशासनिक आवंटन पर सहमति: नए नियमों के तहत सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए कोई नीलामी नहीं होगी. सरकार वैश्विक मानकों के अनुसार कंपनियों को तय फीस पर सीधे प्रशासनिक तौर पर स्पेक्ट्रम आवंटित करेगी.
एलन मस्क की बड़ी जीत: बिना नीलामी के स्पेक्ट्रम आवंटन का यह फैसला स्टारलिंक (Starlink) के लिए एक बड़ी जीत है. मस्क लंबे समय से भारत में इसी मॉडल की वकालत कर रहे थे, जबकि रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी घरेलू कंपनियां स्पेक्ट्रम की नीलामी कराने की मांग कर रही थीं.
लाइसेंस प्रक्रिया पूरी: Starlink, Eutelsat OneWeb और Reliance Jio जैसी बड़ी कंपनियों के पास पहले से ही GMPCS (ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशन बाय सैटेलाइट) का आवश्यक कमर्शियल लाइसेंस उपलब्ध है. आवंटन नीति स्पष्ट होते ही ये कंपनियां सेवाएं शुरू करने के बेहद करीब पहुंच जाएंगी.
कब तक शुरू होगी सेवा?
इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी और अंतिम सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद 2026 के मध्य या अंतिम तिमाहियों तक स्टारलिंक और वनवेब की कमर्शियल सेवाएं भारत में लाइव हो सकती हैं. वहीं रिलायंस जियो अपने महत्वाकांक्षी मेगा-सैटेलाइट प्रोजेक्ट के साथ इस बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारी में है.