भोपाल: राजधानी के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है. अब स्कूलों की हर गतिविधि पर जिला स्तर से सीधे नजर रखी जाएगी. इसके लिए एक सेंट्रलाइज्ड एजुकेशन मानिटरिंग सिस्टम के तहत कंट्रोल कमांड रूम स्थापित किया जा रहा है. इस हाईटेक सिस्टम के जरिए छात्रों की उपस्थिति, सुरक्षा और ड्रापआउट रेट की नियमित ट्रैकिंग होगी.
हाल ही में कमला नेहरू सांदीपनि कन्या शासकीय विद्यालय, टीटी नगर में आयोजित समग्र शिक्षा अभियान की समीक्षा बैठक में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया. इस दौरान उन्होंने छात्राओं से संवाद किया और उनके साथ बैठकर लंच भी किया.
डिजिटल ट्रैकिंग से सुधरेगी व्यवस्था, हर छात्र की बनेगी अपार आईडी
इस बैठक में तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया. कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जिले के सभी स्कूली विद्यार्थियों की अपार आईडी शत-प्रतिशत तैयार की जाए. इस डिजिटल पहचान के जरिए छात्रों के शैक्षणिक सफर की ट्रैकिंग आसान होगी. इसके साथ ही शिक्षा के अधिकार के तहत पात्र बच्चों का समय पर एडमिशन सुनिश्चित करने और सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं.
गलत ड्रापआउट डेटा देने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज
स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के आंकड़ों को लेकर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि पोर्टल पर केवल सही और प्रामाणिक डेटा ही दर्ज किया जाए. यदि किसी भी स्तर पर आंकड़ों में हेराफेरी या लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
समस्याओं के तुरंत समाधान के लिए डीईओ और एसडीएम संभालेंगे मोर्चा
स्कूलों की बुनियादी समस्याओं और शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए एक नई व्यवस्था बनाई गई है. कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को विद्यालयों के लिए प्रथम संपर्क अधिकारी नियुक्त किया है. अब स्कूलों को अपनी किसी भी समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि ये अधिकारी सीधे तौर पर समस्याओं का समाधान करेंगे.