कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब

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जबलपुर : कान्हा नेशनल पार्क में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से बाघों की मौत को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है. हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक व जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने निर्धारित मापदंड के अनुसार कैनाइन डिस्टेंपर वायरस की रोकथाम के निर्देश राज्य व केन्द्र सरकार को जारी किए हैं. युगलपीठ ने रोकथाम के लिए किए गए निवारक और उपचारात्मक उपायों के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए हैं.

कान्हा में निर्धारित मापदंड का पालन नहीं किया गया

मुम्बई के चेम्बूर निवासी अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती की ओर से दायर की गई याचिका में कहा गया है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में लगातार बाघों की मौत हो रही है. याचिका में मौत का मुख्य कारण वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के द्वारा निर्धारित मापदंड का पालन नहीं करना बताया गया है. अप्रैल माह में कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघिन सुनैना व अमाही और उसके चार अर्धवयस्क शावक की मौत हुई है. मौतों से पहले उनकी शारीरिक स्थिति में स्पष्ट गिरावट देखी गई. वहीं, नर बाघ महावीर की भी 19 मई 2026 को मृत्यु हो गई थी. इन सभी मौतों का कारण संभावित सीडीव्ही बताया गया.

इसके अलावा दो वयस्क नर बाघ बालाघाट और किसली क्षेत्रों में मृत पाए गए. कान्हा टाइगर रिजर्व में एक महीने के समय में आठ बाघों की मौत हुई है, जिसके बाद इस मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है.

एनटीसीए की गाइड लाइंस का पालन करना जरूरी

याचिका में आगे कहा गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व में प्रायलुप्त रॉयल बंगाल टाइगर की आबादी की सुरक्षा के लिए वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 प्रोजेक्ट टाइगर व एनटीसीए दिशानिर्देशों और मानक संचालन प्रक्रियाओं के तहत वैधानिक और प्रशासनिक ढांचे का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 व राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा जारी किए गए बाध्यकारी मानक और परिचालन निर्देशों का पालन किया जाना चाहिए, जिनमें निगरानी, रोग निगरानी, पशु चिकित्सा सेवाएं, और अविभाज्य मुख्य आवासों के प्रबंधन से संबंधित निर्देश शामिल हैं.

जारी रहा बाघों की मौत का सिलसिला

याचिका में कहा गया है कि टाइगर रिजर्व में सीटीव्ही से बाघों की मृत्यु का सिलसिला जारी है. इसके बावजूद भी निगरानी, जैव-सुरक्षा और इंटरफेस-प्रबंधन उपायों की पूर्ण प्रकृति, सीमा और कार्यान्वयन की स्थिति के संबंध में कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. निर्धारित प्रोटोकॉल के दिशा-निर्देशों वैधानिक दायित्वों के अनुसार बनाए गए हैं. याचिका में राहत चाही गई है कि निवारण और निगरानी संबंधी उपायों का पालन सुनिश्चित किया जाए. याचिका में केंद्रीय पर्यावरण सचिव, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक व डायरेक्टर कान्हा टाइगर रिजर्व को अनावेदक बनाया गया है.

याचिका की सुनवाई करते हुए युगल पीठ ने रोकथाम के लिए किए गए निवारक और उपचारात्मक उपायों के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के भी निर्देश दिए हैं. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह व अधिवक्ता प्रतीक रूसिया ने पैरवी की. मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को होगी.

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