हिमाचल में 25 साल बाद लौटेगी लॉटरी! सरकार ने बिक्री के लिए ई-टेंडर किया जारी

Parthadmin

शिमला। हिमाचल में करीब 25 साल से बंद लॉटरी व्यवस्था को दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया निर्णायक चरण में पहुंच गई है। वित्त विभाग के तहत निदेशालय कोषागार, लेखा एवं लॉटरी ने पेपर और ऑनलाइन लॉटरी की बिक्री के लिए सोल सेलिंग एजेंट नियुक्त करने को ई-टेंडर जारी कर दिया है। सरकार ने लॉटरी संचालन को डिजिटल, पारदर्शी और कड़े नियमन के तहत चलाने की तैयारी की है।

टेंडर की शर्तों के मुताबिक प्रतिदिन अधिकतम 12 लॉटरी ड्रॉ आयोजित किए जा सकेंगे। इसके अलावा साल में तीन बंपर ड्रॉ होंगे। राष्ट्रीय महत्व के दिनों 26 जनवरी, 15 अगस्त और दो अक्टूबर को ड्रॉ आयोजित नहीं किया जाएगा।

सभी ड्रॉ हिमाचल प्रदेश के किसी सार्वजनिक स्थान पर ड्रॉ जजों की मौजूदगी में होंगे। स्वतंत्र पर्यवेक्षकों और अधिकृत अधिकारियों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई जाएगी। डिजिटल ड्रॉ सिस्टम अपनाने का विकल्प भी रखा गया है।

सरकार को हर साल करोड़ों का राजस्व

सोल सेलिंग एजेंट को सरकार को प्रतिवर्ष 10 करोड़ रुपये लाइसेंस फीस देनी होगी। इसमें हर साल पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा एजेंट को न्यूनतम छह करोड़ रुपये की वार्षिक गारंटीड राशि (एमजीए) देनी होगी। लॉटरी के कुल कारोबार पर कम से कम दो प्रतिशत रेवेन्यू शेयर की बोली लगानी होगी। सबसे अधिक रेवेन्यू शेयर की बोली लगाने वाले तकनीकी रूप से योग्य बोलीदाता को एच-1 घोषित किया जाएगा।

सरकार ने एजेंट के लिए 30 करोड़ रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट भी अनिवार्य की है। यह राशि शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक की अपरिवर्तनीय बैंक गारंटी अथवा एफडीआर के रूप में देनी होगी। प्रत्येक पेपर या ऑनलाइन ड्रॉ के लिए पांच हजार रुपये ड्रॉ खर्च भी एजेंट को देना होगा।

दो साल का होगा अनुबंध

चयनित एजेंट के साथ दो वर्ष का अनुबंध किया जाएगा। प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर सरकार अपने विवेक से इसे दो वर्ष और बढ़ा सकती है। लॉटरी संचालन के लिए एजेंट को स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) गठित करना होगा। बिक्री, वितरण, डिजिटल भुगतान, रिकॉर्ड-कीपिंग और वित्तीय लेनदेन इसी व्यवस्था के तहत किए जाएंगे। इससे प्रत्येक लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड और ऑडिट ट्रेल उपलब्ध रहेगा।

दो करोड़ ईएमडी, पांच लाख टेंडर फीस

टेंडर में भाग लेने वाली कंपनियों को दो करोड़ रुपये की ईएमडी जमा करनी होगी। टेंडर फीस पांच लाख रुपये निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया दो चरणों में होगी। पहले तकनीकी बोली के आधार पर कंपनियों के अनुभव, वित्तीय क्षमता और तकनीकी योग्यता की जांच होगी। इसके बाद पात्र कंपनियों की वित्तीय बोली खोली जाएगी।

14 सितंबर अंतिम तिथि

ई-टेंडर 19 अगस्त को जारी किया गया। बोली दस्तावेज 14 सितंबर शाम चार बजे तक जमा किए जा सकेंगे। प्री-बिड सवाल 28 अगस्त तक भेजे जा सकेंगे और 29 अगस्त को कसुम्पटी, शिमला में प्री-बिड बैठक होगी। ऑनलाइन बोली जमा करने की प्रक्रिया तीन सितंबर से शुरू होगी।

तकनीकी बोली 15 सितंबर को खोली जाएगी। वित्तीय बोली खोलने की तारीख बाद में घोषित होगी। चयनित एजेंट को वित्तीय बोली खुलने के 30 दिन के भीतर लेटर ऑफ अवार्ड जारी किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित औपचारिकताएं पूरी कर लॉटरी संचालन शुरू किया जाएगा।

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