नई दिल्ली: रूसी सुरक्षा एजेंसी एफएसबी (FSB) ने मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव पर आतंकवाद को बढ़ावा देने और आतंकी गतिविधियों में मदद करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. इस मामले में कार्रवाई करते हुए रूस ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को डुरोव के खिलाफ एक अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट भी जारी कर दिया है.
रूसी सरकार के आरोप
रूसी जांच एजेंसी का दावा है कि टेलीग्राम प्लेटफॉर्म अपने सर्वर से उस विवादित सामग्री को हटाने में पूरी तरह विफल रहा, जिसका उपयोग रूसी सीमाओं के भीतर तोड़फोड़, साइबर धोखाधड़ी और हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था. रूस के अनुसार, यूक्रेन की विशेष सुरक्षा एजेंसियां और कई प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन टेलीग्राम का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हत्याओं और आतंकी हमलों की साजिश रचने और उन्हें आपस में तालमेल बिठाकर अंजाम देने के लिए कर रहे हैं.
रूसी नियंत्रण और टेलीग्राम का बढ़ता प्रभाव
वर्ष 2013 में लॉन्च हुआ टेलीग्राम आज दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक है, जिसके वैश्विक स्तर पर एक अरब से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं. रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में यह ऐप दोनों पक्षों के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान का सबसे बड़ा जरिया बन चुका है. रूस लंबे समय से टेलीग्राम पर अपना नियंत्रण कड़ा करने की कोशिश कर रहा है. वह घरेलू बाजार में अपने सरकारी ऐप ‘MAX’ को बढ़ावा दे रहा है ताकि टेलीग्राम के प्रभाव को कम किया जा सके.
डुरोव का कानूनी इतिहास
रूसी मूल के पावेल डुरोव के पास वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और फ्रांस की नागरिकता है. इससे पहले उन्होंने रूस का सबसे बड़ा सोशल मीडिया नेटवर्क ‘VKontakte’ बनाया था, लेकिन सरकारी दबाव के कारण 2014 में उन्हें अपनी हिस्सेदारी बेचकर रूस छोड़ना पड़ा था. रूस से पहले फ्रांस की सरकार भी टेलीग्राम पर आपराधिक गतिविधियों को रोकने में नाकाम रहने और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग न करने के आरोपों के तहत डुरोव के खिलाफ जांच शुरू कर चुकी है. हालांकि, डुरोव ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है. वर्तमान रूसी वारंट पर अभी तक टेलीग्राम की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है.