पंजाब में नहरी सिंचाई का बढ़ा दायरा, 2022 के 22% से बढ़कर 88% पहुंचा नहरी पानी का इस्तेमाल

Parthadmin

लुधियाना। पंजाब में कृषि सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने और गिरते जल स्तर को सुधारने के लिए चलाए गए अभियानों का अब असर धरातल पर दिखने लगा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दावा किया कि राज्य में नहरी पानी को खेतों तक पहुंचाने के लिए राजबाहों के नवीनीकरण और भूमिगत पाइपलाइनों का जो मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है, उससे किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के भूजल स्तर पर भी देखने को मिल रहा है।

मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2022 तक राज्य में महज 22 प्रतिशत नहरी पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए हो पाता था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड 88 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

जिन इलाकों और गांवों तक नहरी पानी पहुंचना नामुमकिन माना जाता था, वहां नई कच्ची कसियों की पहचान कर उन्हें दोबारा चालू किया गया है। जिन जगहों पर राजबाहा बनाना संभव नहीं था, वहां हजारों किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन बिछाकर अंतिम छोर पर स्थित खेतों तक पानी पहुंचाया गया है।

केंद्रीय रिपोर्ट में भूजल स्तर में सुधार की पुष्टि

नहरी पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को ट्यूबवेल और मोटरों के जरिए जमीन से पानी निकालने की जरूरत काफी कम हो गई है। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य के कई इलाकों में जमीन के नीचे का पानी एक से पांच मीटर तक ऊपर आ गया है।

डीजल और बिजली की खपत में आई बड़ी गिरावट

नहरी पानी का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों को सिंचाई का एक बेहतर और सुलभ विकल्प मिला है। इससे न केवल डीजल और बिजली की भारी बचत हो रही है, बल्कि कृषि लागत में भी कमी आई है। मुख्यमंत्री ने राज्य के किसानों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक नहरी पानी का उपयोग करें ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भूजल को बचाया जा सके। आने वाले समय में नहरी पानी का दायरा और बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।

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