नई दिल्ली: देश भर के आम उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने घोषणा की है कि पिछले नौ दिनों में थोक बाजारों (मंडियों) में प्याज की कीमतों में 9 प्रतिशत की गिरावट आई है. थोक बाजारों में दर्ज की गई इस कमी का असर जल्द ही खुदरा बाजार पर भी दिखेगा, जिससे आम जनता की रसोई के बजट को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
खुदरा कीमतों और महंगाई में भारी उछाल
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब आम उपभोक्ताओं के लिए प्याज की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ चुकी थीं. हाल ही में अखिल भारतीय स्तर पर प्याज की औसत खुदरा कीमत ₹53.92 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई थी. यह कीमत पिछले महीने की तुलना में 48 प्रतिशत और पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 94 प्रतिशत अधिक है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में प्याज की महंगाई दर जहां 22.54 प्रतिशत थी, वहीं अगस्त में यह तेजी से उछलकर 48.27 प्रतिशत पर पहुंच गई थी.
मौसमी दबाव और देश में उत्पादन की स्थिति
पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) के एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए उपभोक्ता मामलों की सचिव ने साफ किया कि देश में प्याज की उपलब्धता की कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि आमतौर पर अगस्त और सितंबर के महीनों में मानसूनी बारिश के कारण होने वाली लॉजिस्टिक्स की दिक्कतों, त्योहारी मांग और नई फसल के आने के बीच के अंतराल के कारण प्याज की कीमतें अस्थायी रूप से बढ़ जाती हैं. उत्पादन के मोर्चे पर स्थिति मजबूत है और इस वर्ष देश का कुल प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहा है, जो पिछले साल के लगभग बराबर है.
सरकार की आक्रामक बाजार नीतियां
कीमतों में हो रहे इस उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने बीते 24 अगस्त से ही बड़े पैमाने पर बाजार में हस्तक्षेप शुरू कर दिया था. सरकार अब तक देश के 48 प्रमुख शहरों में अपनी पहुंच बना चुकी है. आम लोगों को सीधे राहत पहुंचाने के लिए एनसीसीएफ (NCCF), नाफेड (NAFED), केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन के जरिए बाजार भाव से काफी कम यानी ₹35 प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर प्याज बेचा जा रहा है.
‘कांदा एक्सप्रेस’ और बफर स्टॉक का सहारा
देश के कोने-कोने में प्याज की तेजी से आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार एक हाइब्रिड ट्रांसपोर्ट मॉडल अपना रही है. इसके तहत सड़कों (ट्रकों) के साथ-साथ भारतीय रेलवे की विशेष मालगाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिन्हें आंतरिक रूप से ‘कांदा एक्सप्रेस’ नाम दिया गया है. यह प्याज सरकार के 1.21 लाख टन के बफर स्टॉक से निकाला जा रहा है, जिसे मूल्य स्थिरीकरण कोष (PSF) के तहत सुरक्षित रखा गया था. सरकार को पूरी उम्मीद है कि थोक कीमतों में आई गिरावट और बफर स्टॉक की इस निरंतर आपूर्ति से त्योहारी सीजन से पहले प्याज के दाम पूरी तरह सामान्य हो जाएंगे.